Monday, 25 December 2017

कर्मा

सत्य का ज्ञान मनुष्य-जाति का उचित ध्येय है, मनुष्य का ध्येय सुख नही, ज्ञान है | कर्म-शब्द का यह विशाल अर्थ है | हम सभी लोग अपने जीवन में कर्म करते रहते है | में आप लोगो से वार्तालाप कर रहा हूँ, यह कर्म है| आप लोग सुन रहे है, वह कर्म है| हम लोग चलते है, यह कर्म है | बात करते है, कर्म है | इसी तरह समुद्र के किनारे खड़े हुये तटभूमि से टकराती लहरों का शब्द सुनकर हम कहते है, वह कितना गंभीर और प्रबल है ; फिर भी हम जानते है की एक बड़ी लहर छोटी-छोटी लाखो-करोडो लहरों से बनती है | यदि आप वास्तव में किसी मनुष्य का चरित्र जानना चाहते है तो उसके बड़े कर्मो को मत देखिये | मनुष्य को उसके छोटे-छोटे काम करते देखिये ; वे ही वास्तव में किसी महापुरुष का सच्चा चरित्र आपको बता सकता है |